Vantara project cost in rupees: भारत की ऐतिहासिक वन्यजीव संरक्षण परियोजना की पूरी जानकारी

📝 Last updated on: July 17, 2025 3:12 pm
Vantara project cost in rupees

Vantara project cost in rupees को लेकर बीते कुछ महीनों में लोगों में जबरदस्त जिज्ञासा देखी गई है। अनंत अंबानी द्वारा शुरू की गई यह परियोजना न केवल भारत बल्कि दुनिया के सबसे बड़े वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्रों में गिनी जा रही है। आइए विस्तार से समझते हैं कि वंतारा प्रोजेक्ट क्या है, इसकी लागत कितनी है, और यह भारत में पर्यावरणीय संरक्षण के क्षेत्र में कितना बड़ा कदम है।

वंतारा परियोजना क्या है?

वंतारा (अर्थ: “वन का तारा”) एक अत्याधुनिक वन्यजीव संरक्षण, पुनर्वास और पुनरुत्पादन केंद्र है, जिसकी स्थापना रिलायंस इंडस्ट्रीज और अनंत अंबानी के नेतृत्व में की गई है। यह गुजरात के जामनगर में रिलायंस की रिफाइनरी साइट पर 3000 एकड़ में फैला हुआ है।

इसका उद्देश्य घायल, तस्करी के शिकार, संकटग्रस्त और परित्यक्त जानवरों को बचाकर उन्हें सुरक्षित वातावरण में उपचार, देखभाल और संभव हो तो उन्हें फिर से जंगल में वापस छोड़ना है।

Vantara project cost in rupees: जानिए इस परियोजना में कितना खर्च हुआ

इस मेगा परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹2,500 करोड़ रुपये है, जो लगभग 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर है। यह खर्च अस्पतालों, जानवरों की देखभाल, वैज्ञानिक शोध, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की नियुक्ति और पुनर्वास कार्यों में उपयोग हो रहा है।

नीचे दी गई तालिका में इस परियोजना के प्रमुख लागत बिंदुओं को दर्शाया गया है:

मुख्य घटकअनुमानित लागत (INR)उद्देश्य
जानवरों का बचाव और परिवहन₹350 करोड़जानवरों को दुनियाभर से बचाकर लाना
प्राकृतिक आवास और बाड़ों का निर्माण₹500 करोड़सुरक्षित और प्राकृतिक वातावरण तैयार करना
पशु चिकित्सालय और रिसर्च सुविधा₹450 करोड़उन्नत चिकित्सा, सर्जरी और ब्रीडिंग केंद्र
पुनर्वास एवं जंगल में पुनर्प्रवेश कार्यक्रम₹400 करोड़जानवरों को फिर से जंगल में छोड़ने की तैयारी
वैश्विक साझेदारियाँ और प्रशिक्षण₹300 करोड़विदेशी विशेषज्ञों के साथ काम करना और स्टाफ को प्रशिक्षित करना
संचालन, सुरक्षा और मानव संसाधन₹500 करोड़तकनीकी स्टाफ, सुरक्षा, तकनीक और लॉजिस्टिक्स

इतनी बड़ी लागत क्यों?

Vantara project cost in rupees को समझने के लिए उसके विजन को समझना जरूरी है। यह सिर्फ एक चिड़ियाघर नहीं, बल्कि एक जीवित अभ्यारण्य है जो पशु कल्याण और जैव विविधता को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम कर रहा है।

इस लागत के पीछे कुछ खास कारण हैं:

  • अत्याधुनिक सुविधाएं: MRI, CT Scan, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, लैप्रोस्कोपी जैसे उपकरण पशु चिकित्सा के लिए मौजूद हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय टीम: वेटरनरी डॉक्टर्स, बायोलॉजिस्ट, और एनिमल बिहेवियर एक्सपर्ट्स को अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका आदि से बुलाया गया है।
  • विशाल परिवहन खर्च: अफ्रीका, एशिया और भारत के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में जानवरों को विशेष विमानों और वाहनों के माध्यम से लाया गया।
  • प्राकृतिक आवास का सृजन: जानवरों के लिए विशेष जलवायु-संवेदनशील क्षेत्र तैयार किए गए हैं जो उनके मूल निवास से मेल खाते हैं।

उपशीर्षक: Vantara project cost in rupees दूरदर्शिता को दर्शाता है

Vantara project cost in rupees सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत की उस दूरदृष्टि को दर्शाता है जिसमें जानवरों को सिर्फ बचाया नहीं जाता, बल्कि उन्हें दोबारा जंगलों में भेजने की तैयारी भी की जाती है।

वंतारा का फोकस केवल बाड़ों में बंद रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका मुख्य उद्देश्य है – रिहैबिलिटेशन और रिवाइल्डिंग, यानी जंगल में वापसी।

वंतारा को मिल रही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता

  • कई एशियाटिक शेर जो गंभीर अवस्था में थे, अब स्वस्थ हैं और जंगल में लौटने की तैयारी में हैं।
  • अफ्रीका से आए हाथी, जो मानव संघर्ष का शिकार हुए थे, अब शांत वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
  • वैश्विक संस्थाएं वंतारा को विश्व का सबसे महत्वाकांक्षी संरक्षण प्रोजेक्ट मान रही हैं।

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जानवरों से आगे: मानव कल्याण और शिक्षा में भी योगदान

वंतारा की लागत केवल पशु कल्याण तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से शिक्षा, पर्यटन, रोजगार और जैव विविधता के संरक्षण में भी बड़ा योगदान हो रहा है:

  • शैक्षणिक केंद्र: छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए जीवविज्ञान, पशु चिकित्सा और पर्यावरण अध्ययन का केंद्र।
  • स्थानीय रोजगार: हजारों लोगों को पशु देखभाल, सुरक्षा और संचालन में प्रशिक्षण देकर रोजगार दिया गया है।
  • इको-टूरिज्म का अवसर: भविष्य में इसे एक सुरक्षित और जिम्मेदार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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निष्कर्ष

आज के समय में जब जैव विविधता संकट में है, ऐसे में Vantara project cost in rupees का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की एक मजबूत नैतिक और वैज्ञानिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है जो दुनिया को यह संदेश देता है – “हमारे जंगलों के तारे फिर से चमक सकते हैं।”