Anant Ambani Dwarka Padyatra: नमस्ते दोस्तों आज मे आप के लिए लाया हु वनतारा की ओर से बहुत ही अच्छी जानकारी यह जानकारी अनंत अंबानी सर की द्वारिका पद यात्रा की है उनकी पद यात्रा का आज 5 पांचवा दिन है। अनंत अंबानी सर ,कहते हैं, “पदयात्रा जामनगर में हमारे घर से द्वारका तक है… यह पिछले 5 दिनों से चल रही है और हम अगले 2-4 दिनों में पहुँच जाएँगे… मेरी पदयात्रा जारी है। भगवान द्वारकाधीश हमें आशीर्वाद दें… मैं युवाओं से कहना चाहूँगा कि वे भगवान द्वारकाधीश पर विश्वास रखें और कोई भी काम करने से पहले भगवान द्वारकाधीश को याद करें, वह काम बिना किसी बाधा के अवश्य पूरा होगा और जब भगवान मौजूद हैं, तो चिंता करने की कोई बात नहीं है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के चेयरपर्सन मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी इन दिनों 141 किलोमीटर की भव्य पदयात्रा पर हैं। यह यात्रा जामनगर से द्वारका तक की है, जिसे वह भगवान द्वारकाधीश की असीम भक्ति और आशीर्वाद के साथ पूरा कर रहे हैं। यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि सेवा और प्रेरणा का एक अद्भुत उदाहरण भी है।
👉 इस लेख में हम अनंत अंबानी की इस ऐतिहासिक पदयात्रा, उनकी सेवा भावनाओं और वन्यजीव संरक्षण में उनके योगदान की विस्तृत जानकारी देंगे।
Anant Ambani Dwarka Padyatra – 5वें दिन तक का सफर

अनंत अंबानी ने अपनी यात्रा 28 मार्च 2024 को जामनगर के मोती खावड़ी से शुरू की थी। आज (1 अप्रैल) इस यात्रा का 5वां दिन है, और अब तक वे 50 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं।
वर्तमान में, वे सोनारडी गांव के पाटिया तक पहुंच चुके हैं और अगले 2-4 दिनों में द्वारका पहुँचने की योजना बना रहे हैं।
अनंत अंबानी का इस यात्रा पर कहना है:
“यह यात्रा जामनगर में हमारे घर से द्वारका तक है… यह पिछले 5 दिनों से चल रही है और हम अगले 2-4 दिनों में पहुँच जाएंगे… मेरी पदयात्रा जारी है। भगवान द्वारकाधीश हमें आशीर्वाद दें… मैं युवाओं से कहना चाहूँगा कि वे भगवान द्वारकाधीश पर विश्वास रखें और कोई भी काम करने से पहले भगवान द्वारकाधीश को याद करें, वह काम बिना किसी बाधा के अवश्य पूरा होगा। जब भगवान मौजूद हैं, तो चिंता करने की कोई बात नहीं है।”
अनंत अंबानी ने 250 मुर्गियों को जीवनदान दिया!

इस यात्रा के दौरान, अनंत अंबानी ने एक परोपकारी कार्य करते हुए बूचड़खाने ले जाई जा रही 250 मुर्गियों को बचाया। उन्होंने इन मुर्गियों को दोगुनी कीमत चुकाकर खरीदा और उन्हें आज़ाद कर दिया। इस दौरान वे एक मुर्गी को हाथ में लेकर चलते भी दिखे, जिससे उनकी दयालुता और पशु प्रेम झलकता है।
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10 अप्रैल को द्वारका में जन्मदिन मनाएंगे अनंत अंबानी
अनंत अंबानी अपना 30वां जन्मदिन 10 अप्रैल को द्वारका में भगवान द्वारकाधीश के दर्शन करके मनाने वाले हैं। यह उनकी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।
“मैं भगवान द्वारकाधीश के आशीर्वाद से अपना जन्मदिन द्वारका में मनाने जा रहा हूँ। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मैं इस पवित्र स्थान पर अपनी यात्रा पूरी करूंगा।”
संस्कृत पाठशाला और मंदिरों में मिला आशीर्वाद


अनंत अंबानी अपनी यात्रा के दौरान वडत्रा गांव स्थित विश्वनाथ वेद संस्कृत पाठशाला पहुँचे, जहाँ उन्होंने संस्थापक मगनभाई राज्यगुरु के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके अलावा, खंभालिया के फुललीया हनुमान मंदिर में भरतदास बापू ने उनका शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया और द्वारकाधीश भगवान की तस्वीर भेंट की।
वन्यजीव संरक्षण के लिए समर्पित वनतारा प्रोजेक्ट

अनंत अंबानी का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘वनतारा’ भारत का सबसे बड़ा एनिमल रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर है।
👉 वनतारा को भारत सरकार के ‘प्राणी मित्र’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया
वनतारा में अब तक 1.5 लाख से अधिक संकटग्रस्त जानवरों को बचाया जा चुका है। यहाँ 2,000 से अधिक प्रजातियों का संरक्षण किया जा रहा है।
FAQs – अनंत अंबानी द्वारका पदयात्रा से जुड़े सवाल
1. अनंत अंबानी की पदयात्रा कितने किलोमीटर की है?
यह यात्रा 141 किलोमीटर लंबी है, जो जामनगर से द्वारका तक की है।
2. अनंत अंबानी अपनी यात्रा के दौरान किन स्थानों पर गए हैं?
वे संस्कृत पाठशालाओं, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर जा रहे हैं और वहाँ आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
3. अनंत अंबानी ने यात्रा के दौरान क्या खास किया?
उन्होंने बूचड़खाने ले जाई जा रही 250 मुर्गियों को बचाया और उन्हें आज़ाद कर दिया।
4. अनंत अंबानी का वन्यजीव संरक्षण प्रोजेक्ट क्या है?
यह ‘वनतारा’ प्रोजेक्ट है, जो भारत का सबसे बड़ा एनिमल रेस्क्यू सेंटर है।
5. अनंत अंबानी अपना जन्मदिन कहाँ मनाने वाले हैं?
वे 10 अप्रैल को द्वारका में अपना 30वां जन्मदिन मनाने वाले हैं।
निष्कर्ष – अनंत अंबानी की यात्रा एक प्रेरणा!
अनंत अंबानी की द्वारका पदयात्रा केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि प्रेरणादायक भी है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने भगवान द्वारकाधीश का आशीर्वाद लिया, वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा दिया, और परोपकारी कार्य किए।
👉 इस ऐतिहासिक यात्रा से युवा पीढ़ी को यह सीख मिलती है कि हमें अपने कार्यों की शुरुआत ईश्वर के आशीर्वाद से करनी चाहिए और परोपकार में विश्वास रखना चाहिए।
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